म्यूजियम में भूत


म्यूजियम में भूत - चंपक कहानियां

Musium me bhoot  Champak stories in Hindi



स्कूल से लौटते ही आर्यन खेलने के लिए अपना बैट ले कर घर से निकल ही रहा था कि फोन की घंटी बज उठी ।
हैल्लो आर्यन , मैं हर्ष बात कर रहा हूँ । तुम अभी तक मेरे घर नही आये  ।
क्या तुम्हें याद नही है कि आज हमें म्यूजीयम जाना था ? 

आर्यन - " मैं तो  बिल्कुल भूल ही गया था अच्छा हुआ तुमने याद दिला दिया ।
मैं बस थोड़ी ही देर में पहुंचता हु ।

जल्दी ही दोनों दोस्त शहर में नए खुले हुए म्यूजीयम में पहुंच गए ।

हर्ष को एंटीक चीजों में बहुत दिलचस्पी थी । लेकिन आर्यन को इन सब चीजों से बोरियत महसूश होती थी , फिर भी दोस्ती की खातिर उसे आना पड़ा ।

देखो ये मुखौटे कितने बड़े और सुंदर हैं । हर्ष ने दो मुखौटे आर्यन को दिखाते हुए कहा ।
" सचमुच सुन्दर हैं ". उस म्यूजियम के डायरेक्टर आर. जी. मेहता ने उन दोनों के कंधों पर हाथ रखते हुए कहा ।
उन दोनों ने पीछे मुड़ कर उनको हैल्लो कहा ।
" इन के अलावा भी यहां कई दिलचस्प चीजे हैं । जैसे राजस्थान में बना हुआ ये लकड़ी का बड़ा बक्सा । देखो इस पर कितनी सुंदर पुरानी पेंटिंग बनी हुई है " ।

" सचमुच बड़ी खूबसूरत चीजें हैं यहां " हर्ष ने कहा ।
" हुं , लगता है तुम्हे एन्टीक  चीज़ो में काफी रुचि है ।
अगर तुम इन सब चीजों का इतिहाश जानना चाहा तो मेरे साथ म्यूजियम की लाइब्रेरी चलो ।

हर्ष झट से तैयार हो गया । तब मेहता साहब उन्हें लाइब्रेरी दिखा कर चले गए ।

" अरे वाह इन कीताबो में तो बहोत कमाल की जानकारियां हैं " हर्ष ने कहा और पढ़ने में डूब गया ।
" अब चलो भी ... क्या सारी किताबें आज ही पढ़ लोगे ?" 
आर्यन ने बोर हो कर कहा ।
 अभी चलते है यार थोड़ा रुको तो देखो इन मे लिखा है कि ' ये मुखौटे अंधेरे में खूब चमकते हैं ' हर्ष  ने बताया ।

पढ़ते - पढ़ते उन्हें काफी देर हो गयी और जब वो बाहर आये तो हैरान रह गए ।
' अरे बाहर कोई भी नही है इसका मतलब म्यूजियम बंद हो गया ।

लेकिन इसके बंद होने का टाइम तो 6 बजे का था फिर इतनी जल्दी ?
अरे , 6 तो बज चुके हैं । आर्यन ने दीवार घड़ी देख कर कहा ।

सचमुच म्यूजियम बंद हो गया था । शाम भी हो चुकी थी । दोनो बुरी तरह घबरा रहे थे ।

तब उन्होंने दरवाजे को खूब पीटा और खूब चिल्लाए ।
लेकिन इससे कोई भी फायदा नही हुआ ।

ऐसा लगता है कि यहां अभी कोई वाचमैन भी नही रखा गया वरना वो हमारी आवाज़ ज़रूर सुनता ।
अब क्या करें ? क्या सारी रात यहीं गुजारनी पडेगी ? हर्ष ने डरते हुए कहा ।

" मेरे माता - पिता तो मुझे ढूंढने निकल गए होँगे । मैं तो बता कर भी नही आया था कि म्यूजियम जा रहा हूँ  ," आर्यन बोला ।

" ठीक कहते हो अब तो भूख भी लग रही है "।
" मेरे जेब मे चॉकलेट के कुछ पैकेट हैं " ।  

फिर दोनो सारे चॉकलेट खा लिए और वहाँ पर्यटकों द्वारा छोड़ी गयी पानी की बोतलों से अपनी प्यास बुझाई ।
" चलो अब सोने की कोशिश करते हैं " हर्ष ने कहा ।
दोनो ने वहां पर रखे हुए कुछ पुरने कालीन और चादर  बिछाये और सो गए ।


जल्दी ही उन्हें नींद आ गई । आधी रात को एक धमाकेदार आवाज़ से उनकी नींद खुल गयी ।
" अरे यह तो बाहर से ताला टूटने की आवाज थी । लगता है कि कोई चोर अंदर घुसने की कोशिश कर रहा है । अब क्या करें ? " हर्ष ने घबरा कर कहा ।

आर्यन ने पूरी तेजी से अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाये और कहा , " वो दोनों मुखौटे लाओ ।
दोनो एक - एक पहन  लेते हैं और फिर उस बड़े बक्से में छिप जाते  हैं "।
दोनो ने मुखौटे पहन लिए और बत्ती बुझा दी ।
फिर उस बड़े बक्से में घुस कर उसका ढक्कन भी बंद कर लिया ।

धीरे - धीरे म्युजियम का दरवाजा खुला । एक भयंकर से दिखने वाला मोटा चोर अंदर घुस आया । उसने फटाफट छोटी और कीमती चीजें बोरी में भरनी शूरु कर दीं ।
इधर बक्से में छिपे दोनो दोस्तो ने  एक,दो,तीन  कहा और बक्से का ढक्कन उठा कर भयंकर आवाजे निकालते हुए बाहर निकल आये ।

वो मुखौटे अंधेरे में चमकने वाले तो थे ही सो अंधेरे में खूब चमक रहे थे ।
उस मोटे चोर को अंधेरे में मुखौटे के सिवा कुछ दिखा ही नहीं । उस के तो होश ही उड़ गए ।
वो डर के मरे थरर थरर  काँपने लगा और भूत ...भूत ...   चिल्लाता हुआ वहां से भागा ।
लेकिन अंधेरे में लोहे के एक पुतले से टकरा गया । उसके आंखों के आगे तारे छा गए ।
और वो वही बेहोश हो कर गिर गया ।

थोड़ी ही देर बाद मेहता साहब दरवाजे से दौड़ते हुए वहां आये और बत्ती जलायी ।
तुरंत ही सारा मामला उन्हें समझ मे आ गया ।

शाबाश ! बच्चों " तुम ने तो बड़ा बहादुरी का काम किया ।
बच्चों मुझे माफ़ कर देना मैं भूल गया था कि तुम दोनो अंदर हो । लेकिन घर पर जैसे ही मुझे याद आया मैं तुरंत यहां दौड़ा चला आया ।"

" कोई बात नही अंकल , यह भी अच्छा ही हुआ , वरना इस चोर को कौन पकड़ता " 
आर्यन ने कहा तो सभी हंस पड़े ।



जल्द ही पुलिस ने वहां आकर चोर को गिरफ्तार कर लिया ॥ 




शिक्षा - मुसीबत के समय घबराने के बजाए अपने सूझ - बूझ से काम लेना चाहिये । अपने अक्ल से हम चाहे तो अपने से बड़े दुश्मन से भी मुकाबला कर सकते हैं और जीत सकते हैं ।




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